Wednesday, November 21, 2018

शिवराज सिंह चौहान ने ऐसा क्या किया है कि हारते ही नहीं?

71 साल के सरताज सिंह वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे. होशंगाबाद से चार बार लोकसभा सांसद चुने गए और यहीं से 1998 के लोकसभा चुनाव में अर्जुन सिंह तक को मात दी थी.

सरताज सिंह पिछले 10 सालों से सिवनी मालवा से विधायक थे और शिवराज सिंह चौहान की कैबिनेट में मंत्री भी बने. बीजेपी ने इस बार उन्हें टिकट नहीं दिया तो कांग्रेस के टिकट पर होशंगाबाद से चुनावी मैदान में हैं.

सरताज सिंह से पूछा कि उनका टिकट किसने काटा तो वो भावुक हो गए. उन्होंने कहा कि जिस बीजेपी में पूरा जीवन खपा दिया और पार्टी को इस इलाक़े में खड़ा किया, उसका ये सिला मिला है.

इतना कुछ होने के बावजूद सरताज सिंह प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की तारीफ़ करते हैं. वो कहते हैं, ''शिवराज बहुत मेहनती इंसान है. वो कभी किसी से ग़ुस्से में बात नहीं करता.''

‏अपने विरोधियों की तुलना में शिवराज सिंह इसी मामले में भारी पड़ जाते हैं.

जब नर्मदा में छलांग लगाते हैं शिवराज
भोपाल में 'द वीक' के पत्रकार दीपक तिवारी ने अपनी किताब में एक वाक़ये का ज़िक्र किया है.

उन्होंने लिखा है, ''जनवरी 2012 में तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी देवास में बैंक नोट की छपाई की नई यूनिट का उद्घाटन करने भोपाल हवाई अड्डे पर पहुंचे तो उनके स्वागत में शिवराज सिंह चौहान खड़े थे. प्रणब मुखर्जी से मिलते ही चौहान ने उन्हें पैर छूकर प्रणाम किया. वहां सुरेश पचौरी और कांतिलाल भूरिया जैसे कांग्रेसी नेता भी खड़े थे, लेकिन प्रणब मुखर्जी ने उनकी तरफ़ ठीक से देखा तक नहीं. प्रणब मुखर्जी से शिवराज सिंह चौहान के रिश्ते बहुत अच्छे रहे हैं.''

शिवराज सिंह चौहान में किसी एक बात पर राजनीतिक विरोधियों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच अगर सहमति है तो वो ये है कि चौहान बदले की भावना नहीं रखते.

दूसरी तरफ़ उनकी एक 'कमज़ोरी' को हर कोई रेखांकित करता है कि ब्यूरोक्रैट पर उनका नियंत्रण नहीं है. सरताज सिंह भी कहते हैं, ''मैंने शिवराज के साथ काम किया है और इस दौरान इस चीज़ को महसूस किया कि वो ब्यूरोक्रैट्स को नियंत्रण में नहीं रख पाते हैं.''

शिवराज सिंह चौहान का गांव जैत नर्मदा नदी के तट पर है. गांव वाले बताते हैं कि चौहान आते हैं तो नहाने के लिए कपड़े खोल नर्मदा में छलांग लगा देते हैं और तैरते हुए नदी के दूसरे छोर पर चले जाते हैं.

शिवराज के राजनीतिक जीवन की शुरुआत
शिवराज सिंह चौहान के राजनीतिक जीवन की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से होती है.

1988 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष बने. 1990 में पहली बार बीजेपी ने चौहान को बुधनी से विधानसभा चुनाव में खड़ा किया. चौहान ने पूरे इलाक़े की पदयात्रा की थी और पहला ही चुनाव जीतने में सफल रहे. तब चौहान की उम्र महज 31 साल थी.

1991 में 10वीं लोकसभा के लिए आम चुनाव हुए. अटल बिहारी वाजपेयी इस चुनाव में दो जगह से खड़े थे. एक उत्तर प्रदेश के लखनऊ और दूसरा मध्य प्रदेश के विदिशा से.

वाजपेयी को दोनों जगह से जीत मिली. उन्होंने सांसदी के लिए लखनऊ को चुना और विदिशा को छोड़ दिया. सुंदरलाल पटवा ने विदिशा के उपचुनाव में शिवराज सिंह चौहान को पार्टी का प्रत्याशी बनाया और वो पहली बार में ही चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंच गए.

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