रूसी शहर माग्नितोगोर्स्क में एक इमारत में भीषण धमाका हुआ है जिसमें कम से कम चार लोगों की मौत हो गई है.
उरल प्रांत में आने वाले इस शहर के अधिकारियों का कहना है कि धमाका की वजह गैस रिसाव है.
धमाके के कारण इमारत के 48 फ्लैट पूरी तरह नेस्तानाबूत हो गए हैं. बताया जा रहा है कि ये इमारत 120 लोगों के रहने का ठिकाना था.
इमारत के मलबे से अब तक 16 लोगों को बाहर निकाला जा चुका है जिनमें सात बच्चे शामिल हैं. चार घायलों को अस्पताल भी पहुंचाया गया है.
मिल रही जानकारी के अनुसार अब तक 40 लोगों का पता नहीं चल पाया है. हालांकि रूसी समाचार चैनल वेस्ती ने अधिकारियों के हवाले से कहा है कि अब तक इमारत में रहने वालों में से 50 लोगों को बचा लिया गया है.
लेकिन वक्त के साथ ये राहत के काम में मुश्किल आ सकती है क्योंकि सर्दी के दिनों में माग्नितोगोर्स्क शहर का पारा माइनस 17 डिग्री सेल्सियस तक होता है. रात को तापमान न्यूनतम माइनस 29 डिग्री सेल्सियस तक भी चला जाता है.
पुतिन ने किया हरसंभव मदद का वादा
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हादसे की जगह पहुंच कर राहत और बचाव कार्य का निरीक्षण किया.
उन्होंने कहा, "आज दिसंबर की 31 तारीख है. पूरी दुनिया जश्न में डूबी है लेकिन माग्नितोगोर्स्क शहर में ये भयंकर हादसा हो गया है. मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ है और मैं वादा करता हूं कि पीड़ितों की हर प्रकार से मदद की जाएगी."
हादसे में बची एक महिला ने बताया कि "घर की छत गिरने की आवाज़ से मेरी आंख खुली. मैंने देखा कि घर की एक दीवार ग़ायब है और मुझे अपने बेटे और मां की आवाज़ सुनाई दे रही थी जो मलबे में दबे हुए थे."
Monday, December 31, 2018
Thursday, December 27, 2018
'दिल्ली में बड़े हमले की साज़िश' नाकाम, ISIS प्रभावित मॉड्यूल का पर्दाफ़ाश
एनआईए ने बुधवार को दिल्ली और उत्तर प्रदेश में 17 जगहों पर छापेमारी कर 10 लोगों को गिरफ़्तार किया है. इनमें एक महिला भी शामिल है. सभी को गुरूवार को दिल्ली के पटियाला कोर्ट में एनआईए की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा.
एनआईए के अनुसार दिल्ली के सीलमपुर और जाफ़राबाद में छह जगहों पर छापे मारे गए. यूपी में 11 जगहों पर छापेमारी हुई जिनमें अमरोहा में छह, लखनऊ में दो, हापुड़ में दो और मेरठ में एक जगह छापा मारा गया.
एनआईए के प्रवक्ता ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में बताया, ''बुधवार सुबह उत्तर प्रदेश और दिल्ली से पाँच-पाँच संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया गया है. ये लोग बम बनाने की एडवांस स्टेज पर थे.''
गिरफ़्तार हुए लोगों के संगठन 'हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम' को ख़ुद को इस्लामिक स्टेट बतानेवाले गुट से प्रभावित मॉड्यूल बताया जा रहा है.
एनआईए ने दावा किया, ''इस संगठन का सरगना मुफ्ती सुहेल इंटरनेट के माध्यम से विदेश में एक हैंडलर से जुड़ा हुआ था. ये लोग आईएस मॉड्यूल से प्रेरित थे, ऐसे में ये साफ़ है कि इस साज़िश में ये लोग क्यों शामिल हुए. ये लोग पहले कभी ऐसी किसी साज़िश में शामिल थे, इसकी जानकारी फिलहाल नहीं है.''
कुल 16 लोगों को हिरासत में लिया गया था. छह अन्य लोगों के बारे में अभी जाँच चल रही है. 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. जो लोग या तो दिल्ली से हैं या यूपी से.
अमरोहा का 29 साल का मुफ्ती सुहेल इस मॉड्यूल का सरगना है. वो अमरोहा की एक मस्जिद में मौलवी है. वो ही सबको प्रभावित करने वाला मुख्य शख़्स है. वही इन लोगों को अलग-अलग सामान लाने के निर्देश देता था. कैसे किससे मिलना है, क्या बात करनी है, ये सब वो लीडर बताता था. ये ग्रुप आत्मघाती हमलों की तैयारी कर रहा था, वो आत्मघाती जैकेट बना रहे थे. ये सामान अमरोहा में बन रहा था.
जिस लेवल की तैयारी थी उससे लगता है बहुत जल्दी हमले करने की योजना थी. इनका दो बातों पर ध्यान था, एक तो ये कि रिमोट संचालित बम बनाए जाएँ, और दूसरा कि ज़रूरत पड़ने पर आत्मघाती धमाका किया जाए.
इसके लिए उन्होंने अपना पैसा लगाया, कुछ लोगों ने घर से सोना चोरी कर बाज़ार में बेचा था उनसे हथियार और बाक़ी सामान ख़रीदा.
उन्होंने आपस में बातचीत के लिए व्हाट्सऐप और टेलिग्राम का इस्तेमाल किया. ये एक बिल्कुल नया आईएस प्रभावित मॉड्यूल था जो विदेश के किसी हैंडलर के संपर्क में थे.
अभी तक मिली जानकारी के हिसाब से लगभग 3-4 महीने पहले ये मॉड्यूल शुरू हुआ था. ये लोग कुछ अहम सुरक्षा स्थानों, अहम लोग और भीड़ वाली जगहों को निशाना बनाना चाहते थे
किसी एक स्टेज पर हमें इन्पुट्स मिले, जिसके बाद हमने अपना काम शुरू किया और अब आज ये छापेमारी हुई है. अभी तक की जानकारी के हिसाब से इन लोगों ने लोकल लेवल पर ट्रेनिंग ली है.
गिरफ्तार किए गए लोगों में ज़्यादातर की उम्र 20 से 30 साल के बीच है. ये अलग-अलग बैकग्राउंड के हैं, एक-दो की वेल्डिंग शॉप है, एक इंजीनियर है, एक बीए-पार्ट 3 में पढ़ रहा है, एक ऑटोड्राइवर है, एक की कपड़ों की दुकान है, एक मौलवी है.
यूपी में गिरफ्तार हुए लोगों में ऐमिटी यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग का एक स्टूडेंट भी है.
100 से ज़्यादा मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं. देसी रॉकेट लॉन्चर भी बरामद किए गए.
एनआईए के अनुसार दिल्ली के सीलमपुर और जाफ़राबाद में छह जगहों पर छापे मारे गए. यूपी में 11 जगहों पर छापेमारी हुई जिनमें अमरोहा में छह, लखनऊ में दो, हापुड़ में दो और मेरठ में एक जगह छापा मारा गया.
एनआईए के प्रवक्ता ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में बताया, ''बुधवार सुबह उत्तर प्रदेश और दिल्ली से पाँच-पाँच संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया गया है. ये लोग बम बनाने की एडवांस स्टेज पर थे.''
गिरफ़्तार हुए लोगों के संगठन 'हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम' को ख़ुद को इस्लामिक स्टेट बतानेवाले गुट से प्रभावित मॉड्यूल बताया जा रहा है.
एनआईए ने दावा किया, ''इस संगठन का सरगना मुफ्ती सुहेल इंटरनेट के माध्यम से विदेश में एक हैंडलर से जुड़ा हुआ था. ये लोग आईएस मॉड्यूल से प्रेरित थे, ऐसे में ये साफ़ है कि इस साज़िश में ये लोग क्यों शामिल हुए. ये लोग पहले कभी ऐसी किसी साज़िश में शामिल थे, इसकी जानकारी फिलहाल नहीं है.''
कुल 16 लोगों को हिरासत में लिया गया था. छह अन्य लोगों के बारे में अभी जाँच चल रही है. 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. जो लोग या तो दिल्ली से हैं या यूपी से.
अमरोहा का 29 साल का मुफ्ती सुहेल इस मॉड्यूल का सरगना है. वो अमरोहा की एक मस्जिद में मौलवी है. वो ही सबको प्रभावित करने वाला मुख्य शख़्स है. वही इन लोगों को अलग-अलग सामान लाने के निर्देश देता था. कैसे किससे मिलना है, क्या बात करनी है, ये सब वो लीडर बताता था. ये ग्रुप आत्मघाती हमलों की तैयारी कर रहा था, वो आत्मघाती जैकेट बना रहे थे. ये सामान अमरोहा में बन रहा था.
जिस लेवल की तैयारी थी उससे लगता है बहुत जल्दी हमले करने की योजना थी. इनका दो बातों पर ध्यान था, एक तो ये कि रिमोट संचालित बम बनाए जाएँ, और दूसरा कि ज़रूरत पड़ने पर आत्मघाती धमाका किया जाए.
इसके लिए उन्होंने अपना पैसा लगाया, कुछ लोगों ने घर से सोना चोरी कर बाज़ार में बेचा था उनसे हथियार और बाक़ी सामान ख़रीदा.
उन्होंने आपस में बातचीत के लिए व्हाट्सऐप और टेलिग्राम का इस्तेमाल किया. ये एक बिल्कुल नया आईएस प्रभावित मॉड्यूल था जो विदेश के किसी हैंडलर के संपर्क में थे.
अभी तक मिली जानकारी के हिसाब से लगभग 3-4 महीने पहले ये मॉड्यूल शुरू हुआ था. ये लोग कुछ अहम सुरक्षा स्थानों, अहम लोग और भीड़ वाली जगहों को निशाना बनाना चाहते थे
किसी एक स्टेज पर हमें इन्पुट्स मिले, जिसके बाद हमने अपना काम शुरू किया और अब आज ये छापेमारी हुई है. अभी तक की जानकारी के हिसाब से इन लोगों ने लोकल लेवल पर ट्रेनिंग ली है.
गिरफ्तार किए गए लोगों में ज़्यादातर की उम्र 20 से 30 साल के बीच है. ये अलग-अलग बैकग्राउंड के हैं, एक-दो की वेल्डिंग शॉप है, एक इंजीनियर है, एक बीए-पार्ट 3 में पढ़ रहा है, एक ऑटोड्राइवर है, एक की कपड़ों की दुकान है, एक मौलवी है.
यूपी में गिरफ्तार हुए लोगों में ऐमिटी यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग का एक स्टूडेंट भी है.
100 से ज़्यादा मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं. देसी रॉकेट लॉन्चर भी बरामद किए गए.
Monday, December 17, 2018
बघेल ने शपथ लेते ही माफ़ किया मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ के किसानों का क़र्ज़
भारत की चुनावी राजनीति में मुश्किल दौर से गुज़र रही कांग्रेस पार्टी के लिए आज यानी 17 दिसंबर का दिन बेहद ख़ास रहा. मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों ने शपथ ली.
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली शक्तिशाली बीजेपी को हरा तीनों राज्यों में सत्ता हासिल की है.
17 दिसंबर को मध्य प्रदेश में कमलनाथ, राजस्थान में अशोक गहलोत और छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.
कमलनाथ मध्य प्रदेश के 18वें मुख्यमंत्री बने हैं. मुख्यमंत्री का पद ग्रहण करते ही कमलनाथ ने 31 मार्च, 2018 तक लिए गए किसानों के दो लाख तक के क़र्ज़ों को माफ़ कर दिया है.
कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी ने चुनावी अभियान में वादा किया था कि कांग्रेस की सरकार बनती है तो दस दिनों के भीतर उनके क़र्ज़ माफ़ कर दिए जाएंगे.
मध्य प्रदेश उन सभी किसानों को इसका फ़ायदा मिलेगा जिन्होंने राष्ट्रीयकृत और कॉपरेटिव बैंकों से छोटे अवधि का फसल लोन दो लाख रुपए तक लिया था.
कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री कमलनाथ के फ़ैसले पर ट्वीट करते हुए लिखा है, ''मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने क़र्ज़ माफ़ कर दिया है, दो और करने जा रहे हैं.''
सोमवार को सबसे पहले अशोक गहलोत ने राजस्थान के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. उसके बाद मध्य प्रदेश में कमलनाथ ने और आख़िर में भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ के सीएम पद की शपथ ली.
कमलनाथ की तर्ज़ पर भूपेश बघेल ने भी किसानों की क़र्ज़ माफ़ी की घोषणा की. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि कैबिनेट की पहली मीटिंग में तीन बड़े फ़ैसले लिए गए हैं. उन्होंने लिखा कि 16 लाख 65 हज़ार से अधिक किसानों का 6100 करोड़ रुपये का कर्ज़ा माफ़ किया गया है.
तीनों राज्यों में कांग्रेस ने विपक्षी एकता भी दिखाने की कोशिश की. शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी ने विपक्षी नेताओं को भी आमंत्रित किया था और लोग इसमें आए भी.
कौन आया और कौन नहीं आया
एनसीपी प्रमुख शरद पवार, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, शरद यादव, नेशनल कॉन्फ़्रेंस के फ़ारूक़ अब्दुल्ला, जेएमएम नेता हेमंत सोरेन, डीएमके नेता स्टालिन, टीएमसी नेता दिनेश त्रिवेदी, कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी मौजूद थे.
हालांकि शपथ ग्रहण समारोह में बीएसपी प्रमुख मायावती और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव नहीं पहुंचे. इनके नहीं आने पर उत्तर प्रदेश में महागठबंधन के भविष्य को लेकर क़यासबाजी भी शुरू हो गई है.
हालांकि मायावती ने मध्य प्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस का समर्थन किया है. राजस्थान बीएसपी के 6 विधायक हैं और मध्य प्रदेश में दो. दोनों राज्यों में मायावती ने कांग्रेस का समर्थन किया है. शपथ ग्रहण समारोह में ममता बनर्जी भी नहीं आईं. ममता ने समारोह में शरीक होने में असमर्थता जताई थी.
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली शक्तिशाली बीजेपी को हरा तीनों राज्यों में सत्ता हासिल की है.
17 दिसंबर को मध्य प्रदेश में कमलनाथ, राजस्थान में अशोक गहलोत और छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.
कमलनाथ मध्य प्रदेश के 18वें मुख्यमंत्री बने हैं. मुख्यमंत्री का पद ग्रहण करते ही कमलनाथ ने 31 मार्च, 2018 तक लिए गए किसानों के दो लाख तक के क़र्ज़ों को माफ़ कर दिया है.
कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी ने चुनावी अभियान में वादा किया था कि कांग्रेस की सरकार बनती है तो दस दिनों के भीतर उनके क़र्ज़ माफ़ कर दिए जाएंगे.
मध्य प्रदेश उन सभी किसानों को इसका फ़ायदा मिलेगा जिन्होंने राष्ट्रीयकृत और कॉपरेटिव बैंकों से छोटे अवधि का फसल लोन दो लाख रुपए तक लिया था.
कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री कमलनाथ के फ़ैसले पर ट्वीट करते हुए लिखा है, ''मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने क़र्ज़ माफ़ कर दिया है, दो और करने जा रहे हैं.''
सोमवार को सबसे पहले अशोक गहलोत ने राजस्थान के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. उसके बाद मध्य प्रदेश में कमलनाथ ने और आख़िर में भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ के सीएम पद की शपथ ली.
कमलनाथ की तर्ज़ पर भूपेश बघेल ने भी किसानों की क़र्ज़ माफ़ी की घोषणा की. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि कैबिनेट की पहली मीटिंग में तीन बड़े फ़ैसले लिए गए हैं. उन्होंने लिखा कि 16 लाख 65 हज़ार से अधिक किसानों का 6100 करोड़ रुपये का कर्ज़ा माफ़ किया गया है.
तीनों राज्यों में कांग्रेस ने विपक्षी एकता भी दिखाने की कोशिश की. शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी ने विपक्षी नेताओं को भी आमंत्रित किया था और लोग इसमें आए भी.
कौन आया और कौन नहीं आया
एनसीपी प्रमुख शरद पवार, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, शरद यादव, नेशनल कॉन्फ़्रेंस के फ़ारूक़ अब्दुल्ला, जेएमएम नेता हेमंत सोरेन, डीएमके नेता स्टालिन, टीएमसी नेता दिनेश त्रिवेदी, कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी मौजूद थे.
हालांकि शपथ ग्रहण समारोह में बीएसपी प्रमुख मायावती और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव नहीं पहुंचे. इनके नहीं आने पर उत्तर प्रदेश में महागठबंधन के भविष्य को लेकर क़यासबाजी भी शुरू हो गई है.
हालांकि मायावती ने मध्य प्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस का समर्थन किया है. राजस्थान बीएसपी के 6 विधायक हैं और मध्य प्रदेश में दो. दोनों राज्यों में मायावती ने कांग्रेस का समर्थन किया है. शपथ ग्रहण समारोह में ममता बनर्जी भी नहीं आईं. ममता ने समारोह में शरीक होने में असमर्थता जताई थी.
Thursday, December 13, 2018
दीपिका ने नहीं हटवाया है RK टैटू, ईशा अंबानी की शादी में दिखी झलक
दीपिका पादुकोण की गर्दन पर बना RK टैटू लंबे समय से चर्चा में है. कई बार खबरें आईं कि एक्ट्रेस ने एक्स बॉयफ्रेंड रणबीर कपूर के नाम का टैटू हटवा दिया है. लेकिन कुछ ही दिनों बाद ये खबर अफवाह साबित हुई. 12 दिसंबर को ईशा अंबानी और आनंद पीरामल की शादी में पहुंचीं दीपिका की गर्दन पर फिर से RK टैटू देखा गया.
हालांकि इस बार ये टैटू पहले से काफी हल्के शेड में नजर आया. लेकिन सोशल मीडिया के लिए इतना काफी था. एंटीलिया में दीपिका की एंट्री का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें उनका बैक लुक दिखाई दे रहा है. वीडियो में दीपिका के RK टैटू की हल्की झलक दिख रही है. एक्ट्रेस ने हेयरबन बनाया हुआ है.
शादी के बाद दीपिका जब मुंबई एयरपोर्ट से बेंगलुरु रवाना हो रही थीं, तब उनकी गर्दन से RK टैटू गायब था. इसके बाद अटकलें तेज हुईं कि एक्ट्रेस ने शादी से पहले टैटू हटवा दिया है. खैर, अब ये साफ है कि एक्ट्रेस ने टैटू हटवाया नहीं है.
अक्सर इवेंट और पार्टियों में दीपिका इस चर्चित टैटू को मेकअप के जरिए छुपा लिया करती हैं. याद हो इस साल कान्स के रेड कारपेट पर भी दीपिका का टैटू नजर नहीं आया था. कई एड शूट के समय भी एक्ट्रेस ने टैटू को छिपाया है.
बताते चलें कि कॉफी विद करण में दीपिका ने RK टैटू पर बयान भी दिया था. उन्होंने कहा था, ''मैंने कभी टैटू हटवाने की नहीं सोची, कभी ऐसा प्लान नहीं किया.'' गौरतलब है कि ब्रेकअप के बाद भी दीपिका-रणबीर अच्छे दोस्त हैं. रणबीर से ब्रेकअप के बाद दीपिका डिप्रेशन में चली गई थीं. तब उनकी जिंदगी में रणवीर सिंह आए.
मध्य प्रदेश में कांग्रेस बहुमत से 2 सीट दूर रही लेकिन सपा-बसपा और निर्दलीयों के समर्थन ने कांग्रेस की सरकार बनने का रास्ता साफ कर दिया. लेकिन मुख्यमंत्री के चुनाव में हो रही देरी ने कांग्रेस को ऐसे दोराहे पर खड़ा कर दिया जहां पर पार्टी की छवि धूमिल हो रही थी. लेकिन गुरुवार रात को सीएम के नाम के ऐलान के साथ तमाम अटकलों पर विराम लग गया. आखिर गांधी परिवार ने कमलनाथ को ही क्यों चुना. इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि कमलनाथ एक ऐसे नेता हैं जो इंदिरा गांधी से लेकर राहुल गांधी तक सबके प्रिय रहे हैं.
संजय गांधी के खास मित्र रहे कमलनाथ ने राहुल का भी विश्वला जीत लिया. अगर ऐसा नहीं होता तो अध्यक्ष चुने जाने के सिर्फ 7 महीने बाद ही उन्होंने कमलनाथ को मध्य प्रदेश का अध्यक्ष बनाकर न बेजा होता. ऐसा माना जाता है कि राहुल को यह बात समझ में आ गई थी कि मध्य प्रदेश में शिवराज को हराने का कमाल कमलनाथ ही कर सकते हैं.
हालांकि इस बार ये टैटू पहले से काफी हल्के शेड में नजर आया. लेकिन सोशल मीडिया के लिए इतना काफी था. एंटीलिया में दीपिका की एंट्री का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें उनका बैक लुक दिखाई दे रहा है. वीडियो में दीपिका के RK टैटू की हल्की झलक दिख रही है. एक्ट्रेस ने हेयरबन बनाया हुआ है.
शादी के बाद दीपिका जब मुंबई एयरपोर्ट से बेंगलुरु रवाना हो रही थीं, तब उनकी गर्दन से RK टैटू गायब था. इसके बाद अटकलें तेज हुईं कि एक्ट्रेस ने शादी से पहले टैटू हटवा दिया है. खैर, अब ये साफ है कि एक्ट्रेस ने टैटू हटवाया नहीं है.
अक्सर इवेंट और पार्टियों में दीपिका इस चर्चित टैटू को मेकअप के जरिए छुपा लिया करती हैं. याद हो इस साल कान्स के रेड कारपेट पर भी दीपिका का टैटू नजर नहीं आया था. कई एड शूट के समय भी एक्ट्रेस ने टैटू को छिपाया है.
बताते चलें कि कॉफी विद करण में दीपिका ने RK टैटू पर बयान भी दिया था. उन्होंने कहा था, ''मैंने कभी टैटू हटवाने की नहीं सोची, कभी ऐसा प्लान नहीं किया.'' गौरतलब है कि ब्रेकअप के बाद भी दीपिका-रणबीर अच्छे दोस्त हैं. रणबीर से ब्रेकअप के बाद दीपिका डिप्रेशन में चली गई थीं. तब उनकी जिंदगी में रणवीर सिंह आए.
मध्य प्रदेश में कांग्रेस बहुमत से 2 सीट दूर रही लेकिन सपा-बसपा और निर्दलीयों के समर्थन ने कांग्रेस की सरकार बनने का रास्ता साफ कर दिया. लेकिन मुख्यमंत्री के चुनाव में हो रही देरी ने कांग्रेस को ऐसे दोराहे पर खड़ा कर दिया जहां पर पार्टी की छवि धूमिल हो रही थी. लेकिन गुरुवार रात को सीएम के नाम के ऐलान के साथ तमाम अटकलों पर विराम लग गया. आखिर गांधी परिवार ने कमलनाथ को ही क्यों चुना. इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि कमलनाथ एक ऐसे नेता हैं जो इंदिरा गांधी से लेकर राहुल गांधी तक सबके प्रिय रहे हैं.
संजय गांधी के खास मित्र रहे कमलनाथ ने राहुल का भी विश्वला जीत लिया. अगर ऐसा नहीं होता तो अध्यक्ष चुने जाने के सिर्फ 7 महीने बाद ही उन्होंने कमलनाथ को मध्य प्रदेश का अध्यक्ष बनाकर न बेजा होता. ऐसा माना जाता है कि राहुल को यह बात समझ में आ गई थी कि मध्य प्रदेश में शिवराज को हराने का कमाल कमलनाथ ही कर सकते हैं.
Monday, December 10, 2018
राष्ट्रपति मैक्रों ने किया न्यूनतम वेतन बढ़ाने का वादा
फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मंहगाई के ख़िलाफ़ चल रहे प्रदर्शनों के जबाव में कई कल्याणकारी क़दम उठाने की घोषणा की है.
टीवी पर प्रसारित राष्ट्र के नाम संदेश में राष्ट्रपति मैक्रों ने न्यूनतम वेतन में बढ़ोत्तरी और टैक्स में छूट देने का ऐलान किया है.
ईंधन पर टैक्स, बढ़ती महंगाई और कई अन्य मुद्दों को लेकर फ़्रांस में चार सप्ताह से हिंसक प्रदर्शन चल रहे थे.
राष्ट्रपति मैक्रों ने हिंसा की आलोचना करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों का ग़ुस्सा ग़हरा है और कई तरह से जायज़ भी है.
राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि 2019 से न्यूनतम वेतन में 100 यूरो प्रतिमाह की बढ़ोत्तरी की जाएगी.
कम आय वाले पेंशनभोगियों पर तय करवृद्धि को भी रद्द कर दिया गया है, ओवरटाइम आय पर अब टैक्स नहीं लगेगा और नियोक्ताओं को साल के अंत में टैक्स फ्री एकमुश्त बोनस देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.
हालांकि मैक्रों ने देश को अमीरों पर टैक्स लगाने से इनकार करते हुए कहा, "ये हमें कमज़ोर कर देगा और हमें नई नौकरियां पैदा करने की ज़रूरत है."
अपनी 'छवि बदलेंगे' मैक्रों
अब तक प्रदर्शनों को नज़रअंदाज़ करते रहे राष्ट्रपति मैक्रों ने स्वीकार किया कि बहुत से लोग अपने जीवनस्तर को लेकर नाख़ुश हैं और उन्हें लगता है कि उन्हें अनदेख किया जा रहा है.
उन्होंने कहा, "बीते चालीस सालों में ऐसे गांवों और बस्तियों में परेशानियां बढ़ी हैं जहां सार्वजनिक सेवाएं सिमट रही हैं और जीवनस्तर ख़राब हुआ है."
उन्होंने कहा कि ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्हें समाज में सही स्थान नहीं मिला है और हमने ऐसे संकेत दिए हैं कि हम उन्हें भूल गए हैं.
"मैं इस परिस्थिति के लिए अपनी ज़िम्मेदारी को स्वीकार करता हूं- मैंने आपको ये महसूस कराया होगा कि मेरी प्राथमिकताएं और चिंताएं कुछ और हैं. मैं जानता हूं कि आपमें से कुछ को मेरी बातों से दुख पहुंचा है."
पेशे से बैंकर रहे इमेनुएल मैक्रों पर आरोप हैं कि वो सामान्य लोगों के संघर्षों को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं.
अपने भाषण में उन्होंने अपनी इस छवि को बदलने का संकेत देते हुए कहा कि वो फ़्रांस के सभी इलाक़ों के मेयरों से मिलेंगे और जनता के मुद्दों पर बहस को बढ़ावा देंगे.
फ़्रांस की राजधानी पेरिस समेत कई शहरों में बीचे चार सप्ताह से हर सप्ताहांत प्रदर्शन किए गए. इस दौरान हज़ारों लोगों को हिरासत में लिया गया और सैकड़ों घायल भी हुए.
बीते शनिवार को हुए प्रदर्शन में सौ से ज़्यादा लोग घायल हुए थे और एक हज़ार से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया था.
हिंसक प्रदर्शनकारियों ने कई गाड़ियों और दुकानों को नुक़सान भी पहुंचाया था. राष्ट्रपति इमेनुएल मैक्रों पर प्रदर्शनकारियों के मुद्दों पर जवाब देने का दबाव था.
पेरिस में मौजूद बीबीसी संवाददाता हग स्कोफ़ील्ड्स के मुताबिक मैक्रों के पास ठोस क़दम उठाने के सिवा और कोई विकल्प नहीं था.
टीवी पर प्रसारित राष्ट्र के नाम संदेश में राष्ट्रपति मैक्रों ने न्यूनतम वेतन में बढ़ोत्तरी और टैक्स में छूट देने का ऐलान किया है.
ईंधन पर टैक्स, बढ़ती महंगाई और कई अन्य मुद्दों को लेकर फ़्रांस में चार सप्ताह से हिंसक प्रदर्शन चल रहे थे.
राष्ट्रपति मैक्रों ने हिंसा की आलोचना करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों का ग़ुस्सा ग़हरा है और कई तरह से जायज़ भी है.
राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि 2019 से न्यूनतम वेतन में 100 यूरो प्रतिमाह की बढ़ोत्तरी की जाएगी.
कम आय वाले पेंशनभोगियों पर तय करवृद्धि को भी रद्द कर दिया गया है, ओवरटाइम आय पर अब टैक्स नहीं लगेगा और नियोक्ताओं को साल के अंत में टैक्स फ्री एकमुश्त बोनस देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.
हालांकि मैक्रों ने देश को अमीरों पर टैक्स लगाने से इनकार करते हुए कहा, "ये हमें कमज़ोर कर देगा और हमें नई नौकरियां पैदा करने की ज़रूरत है."
अपनी 'छवि बदलेंगे' मैक्रों
अब तक प्रदर्शनों को नज़रअंदाज़ करते रहे राष्ट्रपति मैक्रों ने स्वीकार किया कि बहुत से लोग अपने जीवनस्तर को लेकर नाख़ुश हैं और उन्हें लगता है कि उन्हें अनदेख किया जा रहा है.
उन्होंने कहा, "बीते चालीस सालों में ऐसे गांवों और बस्तियों में परेशानियां बढ़ी हैं जहां सार्वजनिक सेवाएं सिमट रही हैं और जीवनस्तर ख़राब हुआ है."
उन्होंने कहा कि ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्हें समाज में सही स्थान नहीं मिला है और हमने ऐसे संकेत दिए हैं कि हम उन्हें भूल गए हैं.
"मैं इस परिस्थिति के लिए अपनी ज़िम्मेदारी को स्वीकार करता हूं- मैंने आपको ये महसूस कराया होगा कि मेरी प्राथमिकताएं और चिंताएं कुछ और हैं. मैं जानता हूं कि आपमें से कुछ को मेरी बातों से दुख पहुंचा है."
पेशे से बैंकर रहे इमेनुएल मैक्रों पर आरोप हैं कि वो सामान्य लोगों के संघर्षों को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं.
अपने भाषण में उन्होंने अपनी इस छवि को बदलने का संकेत देते हुए कहा कि वो फ़्रांस के सभी इलाक़ों के मेयरों से मिलेंगे और जनता के मुद्दों पर बहस को बढ़ावा देंगे.
फ़्रांस की राजधानी पेरिस समेत कई शहरों में बीचे चार सप्ताह से हर सप्ताहांत प्रदर्शन किए गए. इस दौरान हज़ारों लोगों को हिरासत में लिया गया और सैकड़ों घायल भी हुए.
बीते शनिवार को हुए प्रदर्शन में सौ से ज़्यादा लोग घायल हुए थे और एक हज़ार से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया था.
हिंसक प्रदर्शनकारियों ने कई गाड़ियों और दुकानों को नुक़सान भी पहुंचाया था. राष्ट्रपति इमेनुएल मैक्रों पर प्रदर्शनकारियों के मुद्दों पर जवाब देने का दबाव था.
पेरिस में मौजूद बीबीसी संवाददाता हग स्कोफ़ील्ड्स के मुताबिक मैक्रों के पास ठोस क़दम उठाने के सिवा और कोई विकल्प नहीं था.
Wednesday, November 21, 2018
शिवराज सिंह चौहान ने ऐसा क्या किया है कि हारते ही नहीं?
71 साल के सरताज सिंह वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे. होशंगाबाद से चार बार लोकसभा सांसद चुने गए और यहीं से 1998 के लोकसभा चुनाव में अर्जुन सिंह तक को मात दी थी.
सरताज सिंह पिछले 10 सालों से सिवनी मालवा से विधायक थे और शिवराज सिंह चौहान की कैबिनेट में मंत्री भी बने. बीजेपी ने इस बार उन्हें टिकट नहीं दिया तो कांग्रेस के टिकट पर होशंगाबाद से चुनावी मैदान में हैं.
सरताज सिंह से पूछा कि उनका टिकट किसने काटा तो वो भावुक हो गए. उन्होंने कहा कि जिस बीजेपी में पूरा जीवन खपा दिया और पार्टी को इस इलाक़े में खड़ा किया, उसका ये सिला मिला है.
इतना कुछ होने के बावजूद सरताज सिंह प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की तारीफ़ करते हैं. वो कहते हैं, ''शिवराज बहुत मेहनती इंसान है. वो कभी किसी से ग़ुस्से में बात नहीं करता.''
अपने विरोधियों की तुलना में शिवराज सिंह इसी मामले में भारी पड़ जाते हैं.
जब नर्मदा में छलांग लगाते हैं शिवराज
भोपाल में 'द वीक' के पत्रकार दीपक तिवारी ने अपनी किताब में एक वाक़ये का ज़िक्र किया है.
उन्होंने लिखा है, ''जनवरी 2012 में तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी देवास में बैंक नोट की छपाई की नई यूनिट का उद्घाटन करने भोपाल हवाई अड्डे पर पहुंचे तो उनके स्वागत में शिवराज सिंह चौहान खड़े थे. प्रणब मुखर्जी से मिलते ही चौहान ने उन्हें पैर छूकर प्रणाम किया. वहां सुरेश पचौरी और कांतिलाल भूरिया जैसे कांग्रेसी नेता भी खड़े थे, लेकिन प्रणब मुखर्जी ने उनकी तरफ़ ठीक से देखा तक नहीं. प्रणब मुखर्जी से शिवराज सिंह चौहान के रिश्ते बहुत अच्छे रहे हैं.''
शिवराज सिंह चौहान में किसी एक बात पर राजनीतिक विरोधियों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच अगर सहमति है तो वो ये है कि चौहान बदले की भावना नहीं रखते.
दूसरी तरफ़ उनकी एक 'कमज़ोरी' को हर कोई रेखांकित करता है कि ब्यूरोक्रैट पर उनका नियंत्रण नहीं है. सरताज सिंह भी कहते हैं, ''मैंने शिवराज के साथ काम किया है और इस दौरान इस चीज़ को महसूस किया कि वो ब्यूरोक्रैट्स को नियंत्रण में नहीं रख पाते हैं.''
शिवराज सिंह चौहान का गांव जैत नर्मदा नदी के तट पर है. गांव वाले बताते हैं कि चौहान आते हैं तो नहाने के लिए कपड़े खोल नर्मदा में छलांग लगा देते हैं और तैरते हुए नदी के दूसरे छोर पर चले जाते हैं.
शिवराज के राजनीतिक जीवन की शुरुआत
शिवराज सिंह चौहान के राजनीतिक जीवन की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से होती है.
1988 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष बने. 1990 में पहली बार बीजेपी ने चौहान को बुधनी से विधानसभा चुनाव में खड़ा किया. चौहान ने पूरे इलाक़े की पदयात्रा की थी और पहला ही चुनाव जीतने में सफल रहे. तब चौहान की उम्र महज 31 साल थी.
1991 में 10वीं लोकसभा के लिए आम चुनाव हुए. अटल बिहारी वाजपेयी इस चुनाव में दो जगह से खड़े थे. एक उत्तर प्रदेश के लखनऊ और दूसरा मध्य प्रदेश के विदिशा से.
वाजपेयी को दोनों जगह से जीत मिली. उन्होंने सांसदी के लिए लखनऊ को चुना और विदिशा को छोड़ दिया. सुंदरलाल पटवा ने विदिशा के उपचुनाव में शिवराज सिंह चौहान को पार्टी का प्रत्याशी बनाया और वो पहली बार में ही चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंच गए.
सरताज सिंह पिछले 10 सालों से सिवनी मालवा से विधायक थे और शिवराज सिंह चौहान की कैबिनेट में मंत्री भी बने. बीजेपी ने इस बार उन्हें टिकट नहीं दिया तो कांग्रेस के टिकट पर होशंगाबाद से चुनावी मैदान में हैं.
सरताज सिंह से पूछा कि उनका टिकट किसने काटा तो वो भावुक हो गए. उन्होंने कहा कि जिस बीजेपी में पूरा जीवन खपा दिया और पार्टी को इस इलाक़े में खड़ा किया, उसका ये सिला मिला है.
इतना कुछ होने के बावजूद सरताज सिंह प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की तारीफ़ करते हैं. वो कहते हैं, ''शिवराज बहुत मेहनती इंसान है. वो कभी किसी से ग़ुस्से में बात नहीं करता.''
अपने विरोधियों की तुलना में शिवराज सिंह इसी मामले में भारी पड़ जाते हैं.
जब नर्मदा में छलांग लगाते हैं शिवराज
भोपाल में 'द वीक' के पत्रकार दीपक तिवारी ने अपनी किताब में एक वाक़ये का ज़िक्र किया है.
उन्होंने लिखा है, ''जनवरी 2012 में तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी देवास में बैंक नोट की छपाई की नई यूनिट का उद्घाटन करने भोपाल हवाई अड्डे पर पहुंचे तो उनके स्वागत में शिवराज सिंह चौहान खड़े थे. प्रणब मुखर्जी से मिलते ही चौहान ने उन्हें पैर छूकर प्रणाम किया. वहां सुरेश पचौरी और कांतिलाल भूरिया जैसे कांग्रेसी नेता भी खड़े थे, लेकिन प्रणब मुखर्जी ने उनकी तरफ़ ठीक से देखा तक नहीं. प्रणब मुखर्जी से शिवराज सिंह चौहान के रिश्ते बहुत अच्छे रहे हैं.''
शिवराज सिंह चौहान में किसी एक बात पर राजनीतिक विरोधियों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच अगर सहमति है तो वो ये है कि चौहान बदले की भावना नहीं रखते.
दूसरी तरफ़ उनकी एक 'कमज़ोरी' को हर कोई रेखांकित करता है कि ब्यूरोक्रैट पर उनका नियंत्रण नहीं है. सरताज सिंह भी कहते हैं, ''मैंने शिवराज के साथ काम किया है और इस दौरान इस चीज़ को महसूस किया कि वो ब्यूरोक्रैट्स को नियंत्रण में नहीं रख पाते हैं.''
शिवराज सिंह चौहान का गांव जैत नर्मदा नदी के तट पर है. गांव वाले बताते हैं कि चौहान आते हैं तो नहाने के लिए कपड़े खोल नर्मदा में छलांग लगा देते हैं और तैरते हुए नदी के दूसरे छोर पर चले जाते हैं.
शिवराज के राजनीतिक जीवन की शुरुआत
शिवराज सिंह चौहान के राजनीतिक जीवन की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से होती है.
1988 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष बने. 1990 में पहली बार बीजेपी ने चौहान को बुधनी से विधानसभा चुनाव में खड़ा किया. चौहान ने पूरे इलाक़े की पदयात्रा की थी और पहला ही चुनाव जीतने में सफल रहे. तब चौहान की उम्र महज 31 साल थी.
1991 में 10वीं लोकसभा के लिए आम चुनाव हुए. अटल बिहारी वाजपेयी इस चुनाव में दो जगह से खड़े थे. एक उत्तर प्रदेश के लखनऊ और दूसरा मध्य प्रदेश के विदिशा से.
वाजपेयी को दोनों जगह से जीत मिली. उन्होंने सांसदी के लिए लखनऊ को चुना और विदिशा को छोड़ दिया. सुंदरलाल पटवा ने विदिशा के उपचुनाव में शिवराज सिंह चौहान को पार्टी का प्रत्याशी बनाया और वो पहली बार में ही चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंच गए.
Tuesday, November 6, 2018
भगवान राम के स्वागत में भव्य दीपोत्सव को तैयार अयोध्या, जुटेंगे दुनिया भर के मेहमान
राम मंदिर निर्माण को लेकर छिड़ी देशव्यापी बहस के बीच आज अयोध्या में मेगा सेलिब्रेशन की तैयारी है। दिवाली से एक दिन पहले अयोध्या में भव्य दीपोत्सव के सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं। दरअसल, 2019 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर केंद्र ही नहीं यूपी की बीजेपी सरकार पर भी मंदिर निर्माण का भारी दबाव है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि मामला कोर्ट में होने के कारण योगी सरकार अयोध्या में आज भगवान राम की 151 मीटर ऊंची प्रतिमा स्थापित करने का ऐलान कर सकती है।
उधर, दीपोत्सव की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। भगवान श्रीराम के स्वागत के लिए अयोध्या नगरी को एक बार फिर त्रेतायुग की अयोध्या का स्वरूप दिया गया है। सरयू के तट पर 3 लाख दीयों के दीपोत्सव के साथ यूपी की योगी सरकार भगवान श्री राम के स्वागत की तैयारियां कर रही है। आज इस खास आयोजन पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। एक खास बात यह है कि कार्यक्रम में दक्षिण कोरिया के साथ-साथ रूस, इंडोनेशिया और त्रिनिदाद के कलाकार भी अपनी प्रस्तुति देंगे।
मूर्ति से लेकर कई बड़े ऐलान!
माना जा रहा है कि सीएम योगी अयोध्या में मंगलवार को होने वाले दीपोत्सव के कार्यक्रम में कई बड़े ऐलान कर सकते हैं। अयोध्या में भगवान राम की विशाल प्रतिमा स्थापित करने से लेकर संत समाज के लिए कुछ बड़ी घोषणाएं किए जाने की संभावना है। वहीं, धर्मनगरी में तमाम वीआईपी मेहमानों के आगमन को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। भव्य दीपोत्सव में कोरिया गणराज्य की प्रथम महिला किम-जुंग-सुक मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। इसके अलावा यूपी के राज्यपाल राम नाईक, बिहार के राज्यपाल लालजी टंडन और सीएम योगी अपनी कैबिनेट के कई मंत्रियों के साथ इस समारोह में हिस्सा लेंगे।
अयोध्या में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद
मंगलवार को दीपोत्सव में अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के वीआईपी व वीवीआईपी के आने के कारण सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद की गई है। दक्षिण कोरिया की प्रथम महिला के कार्यक्रम में शामिल होने के कारण सुरक्षा दायरा और कड़ा किया गया है। राम कथा पार्क से एनएच 28 को जोड़ने वाले मार्ग के दोनों तरफ बैरिकेडिंग कर दी गई है। सोमवार से ही इस रास्ते से 4 पहिया वाले वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
35 हजार से अधिक पुलिसकर्मी तैनात
बताया जा रहा है कि दीपोत्सव में करीब 35 हजार पुलिसकर्मियों को सुरक्षा के लिए लगाया गया है। डीआईजी सुभाष सिंह बघेल ने बताया 12 एडिशनल एसपी, 30 डीवाईएसपी, 80 इंस्पेक्टर, 250 एसआई, 32 महिला एसआई, 900 कॉन्स्टेबल, 200 महिला कॉन्स्टेबल, 20 टी एस आई यातायात, 13 हेड कॉन्स्टेबल यातायात, 95 कॉन्स्टेबल यातायात, 6 कंपनी पीएसी, दो कंपनी आरएएफ सहित सादी वर्दी में भारी संख्या में पुलिस व देश की खुफिया एजेंसियों ने अयोध्या में डेरा डाल दिया है।
उधर, दीपोत्सव की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। भगवान श्रीराम के स्वागत के लिए अयोध्या नगरी को एक बार फिर त्रेतायुग की अयोध्या का स्वरूप दिया गया है। सरयू के तट पर 3 लाख दीयों के दीपोत्सव के साथ यूपी की योगी सरकार भगवान श्री राम के स्वागत की तैयारियां कर रही है। आज इस खास आयोजन पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। एक खास बात यह है कि कार्यक्रम में दक्षिण कोरिया के साथ-साथ रूस, इंडोनेशिया और त्रिनिदाद के कलाकार भी अपनी प्रस्तुति देंगे।
मूर्ति से लेकर कई बड़े ऐलान!
माना जा रहा है कि सीएम योगी अयोध्या में मंगलवार को होने वाले दीपोत्सव के कार्यक्रम में कई बड़े ऐलान कर सकते हैं। अयोध्या में भगवान राम की विशाल प्रतिमा स्थापित करने से लेकर संत समाज के लिए कुछ बड़ी घोषणाएं किए जाने की संभावना है। वहीं, धर्मनगरी में तमाम वीआईपी मेहमानों के आगमन को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। भव्य दीपोत्सव में कोरिया गणराज्य की प्रथम महिला किम-जुंग-सुक मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। इसके अलावा यूपी के राज्यपाल राम नाईक, बिहार के राज्यपाल लालजी टंडन और सीएम योगी अपनी कैबिनेट के कई मंत्रियों के साथ इस समारोह में हिस्सा लेंगे।
अयोध्या में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद
मंगलवार को दीपोत्सव में अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के वीआईपी व वीवीआईपी के आने के कारण सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद की गई है। दक्षिण कोरिया की प्रथम महिला के कार्यक्रम में शामिल होने के कारण सुरक्षा दायरा और कड़ा किया गया है। राम कथा पार्क से एनएच 28 को जोड़ने वाले मार्ग के दोनों तरफ बैरिकेडिंग कर दी गई है। सोमवार से ही इस रास्ते से 4 पहिया वाले वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
35 हजार से अधिक पुलिसकर्मी तैनात
बताया जा रहा है कि दीपोत्सव में करीब 35 हजार पुलिसकर्मियों को सुरक्षा के लिए लगाया गया है। डीआईजी सुभाष सिंह बघेल ने बताया 12 एडिशनल एसपी, 30 डीवाईएसपी, 80 इंस्पेक्टर, 250 एसआई, 32 महिला एसआई, 900 कॉन्स्टेबल, 200 महिला कॉन्स्टेबल, 20 टी एस आई यातायात, 13 हेड कॉन्स्टेबल यातायात, 95 कॉन्स्टेबल यातायात, 6 कंपनी पीएसी, दो कंपनी आरएएफ सहित सादी वर्दी में भारी संख्या में पुलिस व देश की खुफिया एजेंसियों ने अयोध्या में डेरा डाल दिया है।
फ्लिपकार्ट, ऐमजॉन का त्योहार में बंपर बिक्री का दावा
ऐमजॉन के 89 प्रतिशत नए ग्राहक छोटे कस्बों से हैं। प्राइम मेंबरशिप में करीब दो गुना बढ़ी है। फ्लिपकार्ट ने भी किया रेकॉर्ड वृद्धि का दावा।
ई-कॉमर्स क्षेत्र की दिग्गज कंपनी फ्लिपकार्ट और ऐमजॉन ने इस त्योहारी मौसम में अपने प्लैटफॉर्म पर बंपर बिक्री का दावा किया है। दोनों कंपनियों का कहना है कि उन्हें देश में 99 प्रतिशत से ज्यादा पिनकोड से ग्राहकों के ऑर्डर मिले हैं। कंतार आईएमआरबी और अन्य रिपोर्टों को हवाला देत हुए ऐमजॉन इंडिया के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और भारत के क्षेत्रीय प्रमुख अमित अग्रवाल ने कहा कि इस त्योहारी मौसम पर ऐमजॉन भारत में सबसे ज्यादा देखे जाने वाले और लेनदेन वाली शॉपिंग वेबसाइट (10-15 अक्टूबर, 24-28 अक्टूबर और 2 से 5 नवंबर के बीच) के रूप में उभरी है।
उन्होंने कहा, '99.3 प्रतिशत पिनकोड से उसे कम से कम एक सामान का ऑर्डर किया गया। इसी के साथ 89 प्रतिशत नए ग्राहक छोटे कस्बों से हैं। करीब 70,000 छोटे और मझोले कारोबारियों को एक से एक ऑर्डर मिला है और प्राइम मेंबरशिप में करीब दो गुना बढ़ी है। हम बहुत आभारी है कि भारत के लोगों ने खोजने, पाने और ऑनलाइन कुछ भी खरीदने के लिए हम पर भरोसा किया।'
फेस्टिवल सीजन की बिक्री (9 से 14 अक्टूबर के बीच) में फ्लिपकार्ट की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी से जुड़े सवाल पर अग्रवाल ने कहा, 'हम बिना वैज्ञानिक पद्धतियों पर आधारित रिपोर्ट पर टिप्पणी नहीं करते हैं।'
दोनों प्रतिद्वंद्वी कंपनियां फ्लिपकार्ट और ऐमजॉन इस त्योहारी सीजन में स्मार्टफोन, उपकरणों और फैशन जैसी श्रेणियों में रेकॉर्ड तोड़ बिक्री का दावा कर रही हैं। फ्लिपकार्ट की प्रमुख (वृद्धि) स्मृति रविचंद्रन ने कहा, '1 से 5 नवंबर की मौजूदा सेल हमारे इस साल के बिग बिलियम डेज से दोगुना से ज्यादा रही। हम फैशन श्रेणी में स्पष्ट रूप से अग्रणी हैं... हमारे पास एक को छोड़कर स्मार्टफोन के सभी ब्रैंड हैं।'
उन्होने कहा कि इस मौसम के दौरान ग्राहकों ने विभिन्न खरीदों पर औसतन 7,500 रुपये खर्च किए और हमारे व्यापार का सकल वस्तु मूल्य (जीएमवी) पिछले साल से 90 प्रतिशत अधिक रहा।
मुंबई, छह नवंबर (भाषा) हर्षद मेहता शेयर घोटाले से जुड़े एक मामले में मुंबई की एक अदालत ने हर्षद के भाई अश्निन मेहता समेत नौ अभियुक्तों को बरी कर दिया है। इस मामले में इन लोगों पर 1992 में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के साथ 105 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप था। इस मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत की न्यायाधीश शालिनी फंसाल्कर जोशी ने पिछले सप्ताह इस निर्णय में कहा कि अदालत को यह कहने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि अभियोजन पक्ष इस मामले में आरोपों से आगे कुछ भी साबित करने में नाकाम रहा है। अश्विन मेहता
मुंबई, छह नवंबर (भाषा) हर्षद मेहता शेयर घोटाले से जुड़े एक मामले में मुंबई की एक अदालत ने हर्षद के भाई अश्निन मेहता समेत नौ अभियुक्तों को बरी कर दिया है। इस मामले में इन लोगों पर 1992 में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के साथ 105 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप था। इस मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत की न्यायाधीश शालिनी फंसाल्कर जोशी ने पिछले सप्ताह इस निर्णय में कहा कि अदालत को यह कहने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि अभियोजन पक्ष इस मामले में आरोपों से आगे कुछ भी साबित करने में नाकाम रहा है। अश्विन मेहता के अलावा एसबीआई के प्रतिभूति विभाग के प्रभारी राम सीतारमन और सात अन्य अधिकारी- भूषण राउत, सी रवि कुमार, एस सुरेश बाबू, पी मुरलीधरन,
ई-कॉमर्स क्षेत्र की दिग्गज कंपनी फ्लिपकार्ट और ऐमजॉन ने इस त्योहारी मौसम में अपने प्लैटफॉर्म पर बंपर बिक्री का दावा किया है। दोनों कंपनियों का कहना है कि उन्हें देश में 99 प्रतिशत से ज्यादा पिनकोड से ग्राहकों के ऑर्डर मिले हैं। कंतार आईएमआरबी और अन्य रिपोर्टों को हवाला देत हुए ऐमजॉन इंडिया के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और भारत के क्षेत्रीय प्रमुख अमित अग्रवाल ने कहा कि इस त्योहारी मौसम पर ऐमजॉन भारत में सबसे ज्यादा देखे जाने वाले और लेनदेन वाली शॉपिंग वेबसाइट (10-15 अक्टूबर, 24-28 अक्टूबर और 2 से 5 नवंबर के बीच) के रूप में उभरी है।
उन्होंने कहा, '99.3 प्रतिशत पिनकोड से उसे कम से कम एक सामान का ऑर्डर किया गया। इसी के साथ 89 प्रतिशत नए ग्राहक छोटे कस्बों से हैं। करीब 70,000 छोटे और मझोले कारोबारियों को एक से एक ऑर्डर मिला है और प्राइम मेंबरशिप में करीब दो गुना बढ़ी है। हम बहुत आभारी है कि भारत के लोगों ने खोजने, पाने और ऑनलाइन कुछ भी खरीदने के लिए हम पर भरोसा किया।'
फेस्टिवल सीजन की बिक्री (9 से 14 अक्टूबर के बीच) में फ्लिपकार्ट की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी से जुड़े सवाल पर अग्रवाल ने कहा, 'हम बिना वैज्ञानिक पद्धतियों पर आधारित रिपोर्ट पर टिप्पणी नहीं करते हैं।'
दोनों प्रतिद्वंद्वी कंपनियां फ्लिपकार्ट और ऐमजॉन इस त्योहारी सीजन में स्मार्टफोन, उपकरणों और फैशन जैसी श्रेणियों में रेकॉर्ड तोड़ बिक्री का दावा कर रही हैं। फ्लिपकार्ट की प्रमुख (वृद्धि) स्मृति रविचंद्रन ने कहा, '1 से 5 नवंबर की मौजूदा सेल हमारे इस साल के बिग बिलियम डेज से दोगुना से ज्यादा रही। हम फैशन श्रेणी में स्पष्ट रूप से अग्रणी हैं... हमारे पास एक को छोड़कर स्मार्टफोन के सभी ब्रैंड हैं।'
उन्होने कहा कि इस मौसम के दौरान ग्राहकों ने विभिन्न खरीदों पर औसतन 7,500 रुपये खर्च किए और हमारे व्यापार का सकल वस्तु मूल्य (जीएमवी) पिछले साल से 90 प्रतिशत अधिक रहा।
मुंबई, छह नवंबर (भाषा) हर्षद मेहता शेयर घोटाले से जुड़े एक मामले में मुंबई की एक अदालत ने हर्षद के भाई अश्निन मेहता समेत नौ अभियुक्तों को बरी कर दिया है। इस मामले में इन लोगों पर 1992 में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के साथ 105 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप था। इस मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत की न्यायाधीश शालिनी फंसाल्कर जोशी ने पिछले सप्ताह इस निर्णय में कहा कि अदालत को यह कहने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि अभियोजन पक्ष इस मामले में आरोपों से आगे कुछ भी साबित करने में नाकाम रहा है। अश्विन मेहता
मुंबई, छह नवंबर (भाषा) हर्षद मेहता शेयर घोटाले से जुड़े एक मामले में मुंबई की एक अदालत ने हर्षद के भाई अश्निन मेहता समेत नौ अभियुक्तों को बरी कर दिया है। इस मामले में इन लोगों पर 1992 में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के साथ 105 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप था। इस मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत की न्यायाधीश शालिनी फंसाल्कर जोशी ने पिछले सप्ताह इस निर्णय में कहा कि अदालत को यह कहने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि अभियोजन पक्ष इस मामले में आरोपों से आगे कुछ भी साबित करने में नाकाम रहा है। अश्विन मेहता के अलावा एसबीआई के प्रतिभूति विभाग के प्रभारी राम सीतारमन और सात अन्य अधिकारी- भूषण राउत, सी रवि कुमार, एस सुरेश बाबू, पी मुरलीधरन,
Friday, November 2, 2018
इधर राफेल पर घेर रहे थे राहुल, उधर बोफोर्स पर कांग्रेस को मिली राहत
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जिस समय राफेल सौदे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेर रहे थे ठीक उसी समय उनकी पार्टी और खुद उनके लिए बड़ी राहत की खबर सुप्रीम कोर्ट से आई जिसमें देश की शीर्ष अदालत ने सीबीआई की अपील पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया.
सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को 64 करोड़ रुपये के बोफोर्स तोप रिश्वतकांड मामले की सुनवाई हुई जिसमें उसने अपील के लिए 4700 दिन की देरी के आधार पर सुनवाई करने से मना कर दिया. इस संवेदनशील मामले में सीबीआई ने साल के शुरुआत में ही सुप्रीम कोर्ट में एक अपील दायर की थी.
13 साल पहले HC ने दिया फैसला
बोफोर्स मामले में सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप खारिज करने के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के विरुद्ध 13 साल के विलंब के बाद यह अपील दायर की गई थी. यह मामला सुनवाई के लिए प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ के सामने आया जिसने सुनवाई करने से इनकार कर दिया.
सीबीआई ने दिल्ली हाईकोर्ट के 31 मई 2005 के फैसले के खिलाफ इस साल दो फरवरी को एक अपील दायर की थी. वहीं बीजेपी नेता और अधिवक्ता अजय अग्रवाल ने भी 2005 में शीर्ष न्यायालय में एक अपील दायर की थी. हालांकि सीबीआई हाईकोर्ट के आदेश को 90 दिनों के अंदर चुनौती देने में नाकाम रही थी.
1987 में सामने आया बोफोर्स केस
बोफोर्स केस 1987 में सामने आया था. इसमें स्वीडन से तोप खरीदने के सौदे में रिश्वत के लेन-देन के आरोपों में तत्कालीन प्रधानमंत्री दिवंगत राजीव गांधी और दिवंगत इतालवी कारोबारी ओतावियो क्वात्रोकी के नाम घिर गए थे. 1989 में कांग्रेस को इसकी वजह से सत्ता तक गंवानी पड़ी थी.
भारत सरकार और स्वीडन सरकार के रूप में एबी बोफोर्स कंपनी से तोपों को लेकर 1437 करोड़ रुपये की डील हुई थी. भारतीय सेना को इसकी पहली किस्त 24 मार्च, 1986 को मिली थी, वहीं 16 अप्रैल, 1987 में स्वीडन के एक रेडियो में इसमें दलाली की बात की थी.
सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को 64 करोड़ रुपये के बोफोर्स तोप रिश्वतकांड मामले की सुनवाई हुई जिसमें उसने अपील के लिए 4700 दिन की देरी के आधार पर सुनवाई करने से मना कर दिया. इस संवेदनशील मामले में सीबीआई ने साल के शुरुआत में ही सुप्रीम कोर्ट में एक अपील दायर की थी.
13 साल पहले HC ने दिया फैसला
बोफोर्स मामले में सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप खारिज करने के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के विरुद्ध 13 साल के विलंब के बाद यह अपील दायर की गई थी. यह मामला सुनवाई के लिए प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ के सामने आया जिसने सुनवाई करने से इनकार कर दिया.
सीबीआई ने दिल्ली हाईकोर्ट के 31 मई 2005 के फैसले के खिलाफ इस साल दो फरवरी को एक अपील दायर की थी. वहीं बीजेपी नेता और अधिवक्ता अजय अग्रवाल ने भी 2005 में शीर्ष न्यायालय में एक अपील दायर की थी. हालांकि सीबीआई हाईकोर्ट के आदेश को 90 दिनों के अंदर चुनौती देने में नाकाम रही थी.
1987 में सामने आया बोफोर्स केस
बोफोर्स केस 1987 में सामने आया था. इसमें स्वीडन से तोप खरीदने के सौदे में रिश्वत के लेन-देन के आरोपों में तत्कालीन प्रधानमंत्री दिवंगत राजीव गांधी और दिवंगत इतालवी कारोबारी ओतावियो क्वात्रोकी के नाम घिर गए थे. 1989 में कांग्रेस को इसकी वजह से सत्ता तक गंवानी पड़ी थी.
भारत सरकार और स्वीडन सरकार के रूप में एबी बोफोर्स कंपनी से तोपों को लेकर 1437 करोड़ रुपये की डील हुई थी. भारतीय सेना को इसकी पहली किस्त 24 मार्च, 1986 को मिली थी, वहीं 16 अप्रैल, 1987 में स्वीडन के एक रेडियो में इसमें दलाली की बात की थी.
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