Monday, December 31, 2018

रूस में भीषण धमाका, 4 की मौत, 40 लापता

रूसी शहर माग्नितोगोर्स्क में एक इमारत में भीषण धमाका हुआ है जिसमें कम से कम चार लोगों की मौत हो गई है.

उरल प्रांत में आने वाले इस शहर के अधिकारियों का कहना है कि धमाका की वजह गैस रिसाव है.

धमाके के कारण इमारत के 48 फ्लैट पूरी तरह नेस्तानाबूत हो गए हैं. बताया जा रहा है कि ये इमारत 120 लोगों के रहने का ठिकाना था.

इमारत के मलबे से अब तक 16 लोगों को बाहर निकाला जा चुका है जिनमें सात बच्चे शामिल हैं. चार घायलों को अस्पताल भी पहुंचाया गया है.

मिल रही जानकारी के अनुसार अब तक 40 लोगों का पता नहीं चल पाया है. हालांकि रूसी समाचार चैनल वेस्ती ने अधिकारियों के हवाले से कहा है कि अब तक इमारत में रहने वालों में से 50 लोगों को बचा लिया गया है.

लेकिन वक्त के साथ ये राहत के काम में मुश्किल आ सकती है क्योंकि सर्दी के दिनों में माग्नितोगोर्स्क शहर का पारा माइनस 17 डिग्री सेल्सियस तक होता है. रात को तापमान न्यूनतम माइनस 29 डिग्री सेल्सियस तक भी चला जाता है.

पुतिन ने किया हरसंभव मदद का वादा
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हादसे की जगह पहुंच कर राहत और बचाव कार्य का निरीक्षण किया.

उन्होंने कहा, "आज दिसंबर की 31 तारीख है. पूरी दुनिया जश्न में डूबी है लेकिन माग्नितोगोर्स्क शहर में ये भयंकर हादसा हो गया है. मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ है और मैं वादा करता हूं कि पीड़ितों की हर प्रकार से मदद की जाएगी."

हादसे में बची एक महिला ने बताया कि "घर की छत गिरने की आवाज़ से मेरी आंख खुली. मैंने देखा कि घर की एक दीवार ग़ायब है और मुझे अपने बेटे और मां की आवाज़ सुनाई दे रही थी जो मलबे में दबे हुए थे."

Thursday, December 27, 2018

'दिल्ली में बड़े हमले की साज़िश' नाकाम, ISIS प्रभावित मॉड्यूल का पर्दाफ़ाश

एनआईए ने बुधवार को दिल्ली और उत्तर प्रदेश में 17 जगहों पर छापेमारी कर 10 लोगों को गिरफ़्तार किया है. इनमें एक महिला भी शामिल है. सभी को गुरूवार को दिल्ली के पटियाला कोर्ट में एनआईए की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा.

एनआईए के अनुसार दिल्ली के सीलमपुर और जाफ़राबाद में छह जगहों पर छापे मारे गए. यूपी में 11 जगहों पर छापेमारी हुई जिनमें अमरोहा में छह, लखनऊ में दो, हापुड़ में दो और मेरठ में एक जगह छापा मारा गया.

एनआईए के प्रवक्ता ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में बताया, ''बुधवार सुबह उत्तर प्रदेश और दिल्ली से पाँच-पाँच संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया गया है. ये लोग बम बनाने की एडवांस स्टेज पर थे.''

गिरफ़्तार हुए लोगों के संगठन 'हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम' को ख़ुद को इस्लामिक स्टेट बतानेवाले गुट से प्रभावित मॉड्यूल बताया जा रहा है.

एनआईए ने दावा किया, ''इस संगठन का सरगना मुफ्ती सुहेल इंटरनेट के माध्यम से विदेश में एक हैंडलर से जुड़ा हुआ था. ये लोग आईएस मॉड्यूल से प्रेरित थे, ऐसे में ये साफ़ है कि इस साज़िश में ये लोग क्यों शामिल हुए. ये लोग पहले कभी ऐसी किसी साज़िश में शामिल थे, इसकी जानकारी फिलहाल नहीं है.''

कुल 16 लोगों को हिरासत में लिया गया था. छह अन्य लोगों के बारे में अभी जाँच चल रही है. 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. जो लोग या तो दिल्ली से हैं या यूपी से.

अमरोहा का 29 साल का मुफ्ती सुहेल इस मॉड्यूल का सरगना है. वो अमरोहा की एक मस्जिद में मौलवी है. वो ही सबको प्रभावित करने वाला मुख्य शख़्स है. वही इन लोगों को अलग-अलग सामान लाने के निर्देश देता था. कैसे किससे मिलना है, क्या बात करनी है, ये सब वो लीडर बताता था. ये ग्रुप आत्मघाती हमलों की तैयारी कर रहा था, वो आत्मघाती जैकेट बना रहे थे. ये सामान अमरोहा में बन रहा था.

जिस लेवल की तैयारी थी उससे लगता है बहुत जल्दी हमले करने की योजना थी. इनका दो बातों पर ध्यान था, एक तो ये कि रिमोट संचालित बम बनाए जाएँ, और दूसरा कि ज़रूरत पड़ने पर आत्मघाती धमाका किया जाए.
इसके लिए उन्होंने अपना पैसा लगाया, कुछ लोगों ने घर से सोना चोरी कर बाज़ार में बेचा था उनसे हथियार और बाक़ी सामान ख़रीदा.

उन्होंने आपस में बातचीत के लिए व्हाट्सऐप और टेलिग्राम का इस्तेमाल किया. ये एक बिल्कुल नया आईएस प्रभावित मॉड्यूल था जो विदेश के किसी हैंडलर के संपर्क में थे.

अभी तक मिली जानकारी के हिसाब से लगभग 3-4 महीने पहले ये मॉड्यूल शुरू हुआ था. ये लोग कुछ अहम सुरक्षा स्थानों, अहम लोग और भीड़ वाली जगहों को निशाना बनाना चाहते थे

किसी एक स्टेज पर हमें इन्पुट्स मिले, जिसके बाद हमने अपना काम शुरू किया और अब आज ये छापेमारी हुई है. अभी तक की जानकारी के हिसाब से इन लोगों ने लोकल लेवल पर ट्रेनिंग ली है.

गिरफ्तार किए गए लोगों में ज़्यादातर की उम्र 20 से 30 साल के बीच है. ये अलग-अलग बैकग्राउंड के हैं, एक-दो की वेल्डिंग शॉप है, एक इंजीनियर है, एक बीए-पार्ट 3 में पढ़ रहा है, एक ऑटोड्राइवर है, एक की कपड़ों की दुकान है, एक मौलवी है.

यूपी में गिरफ्तार हुए लोगों में ऐमिटी यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग का एक स्टूडेंट भी है.
100 से ज़्यादा मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं. देसी रॉकेट लॉन्चर भी बरामद किए गए.

Monday, December 17, 2018

बघेल ने शपथ लेते ही माफ़ किया मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ के किसानों का क़र्ज़

भारत की चुनावी राजनीति में मुश्किल दौर से गुज़र रही कांग्रेस पार्टी के लिए आज यानी 17 दिसंबर का दिन बेहद ख़ास रहा. मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों ने शपथ ली.

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली शक्तिशाली बीजेपी को हरा तीनों राज्यों में सत्ता हासिल की है.

17 दिसंबर को मध्य प्रदेश में कमलनाथ, राजस्थान में अशोक गहलोत और छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.

कमलनाथ मध्य प्रदेश के 18वें मुख्यमंत्री बने हैं. मुख्यमंत्री का पद ग्रहण करते ही कमलनाथ ने 31 मार्च, 2018 तक लिए गए किसानों के दो लाख तक के क़र्ज़ों को माफ़ कर दिया है.

कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी ने चुनावी अभियान में वादा किया था कि कांग्रेस की सरकार बनती है तो दस दिनों के भीतर उनके क़र्ज़ माफ़ कर दिए जाएंगे.

मध्य प्रदेश उन सभी किसानों को इसका फ़ायदा मिलेगा जिन्होंने राष्ट्रीयकृत और कॉपरेटिव बैंकों से छोटे अवधि का फसल लोन दो लाख रुपए तक लिया था.

कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री कमलनाथ के फ़ैसले पर ट्वीट करते हुए लिखा है, ''मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने क़र्ज़ माफ़ कर दिया है, दो और करने जा रहे हैं.''

सोमवार को सबसे पहले अशोक गहलोत ने राजस्थान के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. उसके बाद मध्य प्रदेश में कमलनाथ ने और आख़िर में भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ के सीएम पद की शपथ ली.

कमलनाथ की तर्ज़ पर भूपेश बघेल ने भी किसानों की क़र्ज़ माफ़ी की घोषणा की. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि कैबिनेट की पहली मीटिंग में तीन बड़े फ़ैसले लिए गए हैं. उन्होंने लिखा कि 16 लाख 65 हज़ार से अधिक किसानों का 6100 करोड़ रुपये का कर्ज़ा माफ़ किया गया है.

तीनों राज्यों में कांग्रेस ने विपक्षी एकता भी दिखाने की कोशिश की. शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी ने विपक्षी नेताओं को भी आमंत्रित किया था और लोग इसमें आए भी.

कौन आया और कौन नहीं आया
एनसीपी प्रमुख शरद पवार, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, शरद यादव, नेशनल कॉन्फ़्रेंस के फ़ारूक़ अब्दुल्ला, जेएमएम नेता हेमंत सोरेन, डीएमके नेता स्टालिन, टीएमसी नेता दिनेश त्रिवेदी, कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी मौजूद थे.

हालांकि शपथ ग्रहण समारोह में बीएसपी प्रमुख मायावती और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव नहीं पहुंचे. इनके नहीं आने पर उत्तर प्रदेश में महागठबंधन के भविष्य को लेकर क़यासबाजी भी शुरू हो गई है.

हालांकि मायावती ने मध्य प्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस का समर्थन किया है. राजस्थान बीएसपी के 6 विधायक हैं और मध्य प्रदेश में दो. दोनों राज्यों में मायावती ने कांग्रेस का समर्थन किया है. शपथ ग्रहण समारोह में ममता बनर्जी भी नहीं आईं. ममता ने समारोह में शरीक होने में असमर्थता जताई थी.

Thursday, December 13, 2018

दीपिका ने नहीं हटवाया है RK टैटू, ईशा अंबानी की शादी में दिखी झलक

दीपिका पादुकोण की गर्दन पर बना RK टैटू लंबे समय से चर्चा में है. कई बार खबरें आईं कि एक्ट्रेस ने एक्स बॉयफ्रेंड रणबीर कपूर के नाम का टैटू हटवा दिया है. लेकिन कुछ ही दिनों बाद ये खबर अफवाह साबित हुई. 12 दिसंबर को ईशा अंबानी और आनंद पीरामल की शादी में पहुंचीं दीपिका की गर्दन पर फिर से RK टैटू देखा गया.

हालांकि इस बार ये टैटू पहले से काफी हल्के शेड में नजर आया. लेकिन सोशल मीडिया के लिए इतना काफी था. एंटीलिया में दीपिका की एंट्री का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें उनका बैक लुक दिखाई दे रहा है. वीडियो में दीपिका के RK टैटू की हल्की झलक दिख रही है. एक्ट्रेस ने हेयरबन बनाया हुआ है.


शादी के बाद दीपिका जब मुंबई एयरपोर्ट से बेंगलुरु रवाना हो रही थीं, तब उनकी गर्दन से RK टैटू गायब था. इसके बाद अटकलें तेज हुईं कि एक्ट्रेस ने शादी से पहले टैटू हटवा दिया है. खैर, अब ये साफ है कि एक्ट्रेस ने टैटू हटवाया नहीं है.

अक्सर इवेंट और पार्टियों में दीपिका इस चर्चित टैटू को मेकअप के जरिए छुपा लिया करती हैं. याद हो इस साल कान्स के रेड कारपेट पर भी दीपिका का टैटू नजर नहीं आया था. कई एड शूट के समय भी एक्ट्रेस ने टैटू को छिपाया है.

बताते चलें कि कॉफी विद करण में दीपिका ने RK टैटू पर बयान भी दिया था. उन्होंने कहा था, ''मैंने कभी टैटू हटवाने की नहीं सोची, कभी ऐसा प्लान नहीं किया.'' गौरतलब है कि ब्रेकअप के बाद भी दीपिका-रणबीर अच्छे दोस्त हैं. रणबीर से ब्रेकअप के बाद दीपिका डिप्रेशन में चली गई थीं. तब उनकी जिंदगी में रणवीर सिंह आए.

मध्य प्रदेश में कांग्रेस बहुमत से 2 सीट दूर रही लेकिन सपा-बसपा और निर्दलीयों के समर्थन ने कांग्रेस की सरकार बनने का रास्ता साफ कर दिया. लेकिन मुख्यमंत्री के चुनाव में हो रही देरी ने कांग्रेस को ऐसे दोराहे पर खड़ा कर दिया जहां पर पार्टी की छवि धूमिल हो रही थी. लेकिन गुरुवार रात को सीएम के नाम के ऐलान के साथ तमाम अटकलों पर विराम लग गया. आखिर गांधी परिवार ने कमलनाथ को ही क्यों चुना. इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि कमलनाथ एक ऐसे नेता हैं जो इंदिरा गांधी से लेकर राहुल गांधी तक सबके प्रिय रहे हैं.

संजय गांधी के खास मित्र रहे कमलनाथ ने राहुल का भी विश्वला जीत लिया. अगर ऐसा नहीं होता तो अध्यक्ष चुने जाने के सिर्फ 7 महीने बाद ही उन्होंने कमलनाथ को मध्य प्रदेश का अध्यक्ष बनाकर न बेजा होता. ऐसा माना जाता है कि राहुल को यह बात समझ में आ गई थी कि मध्य प्रदेश में शिवराज को हराने का कमाल कमलनाथ ही कर सकते हैं.

Monday, December 10, 2018

राष्ट्रपति मैक्रों ने किया न्यूनतम वेतन बढ़ाने का वादा

फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मंहगाई के ख़िलाफ़ चल रहे प्रदर्शनों के जबाव में कई कल्याणकारी क़दम उठाने की घोषणा की है.

टीवी पर प्रसारित राष्ट्र के नाम संदेश में राष्ट्रपति मैक्रों ने न्यूनतम वेतन में बढ़ोत्तरी और टैक्स में छूट देने का ऐलान किया है.

ईंधन पर टैक्स, बढ़ती महंगाई और कई अन्य मुद्दों को लेकर फ़्रांस में चार सप्ताह से हिंसक प्रदर्शन चल रहे थे.

राष्ट्रपति मैक्रों ने हिंसा की आलोचना करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों का ग़ुस्सा ग़हरा है और कई तरह से जायज़ भी है.

राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि 2019 से न्यूनतम वेतन में 100 यूरो प्रतिमाह की बढ़ोत्तरी की जाएगी.

कम आय वाले पेंशनभोगियों पर तय करवृद्धि को भी रद्द कर दिया गया है, ओवरटाइम आय पर अब टैक्स नहीं लगेगा और नियोक्ताओं को साल के अंत में टैक्स फ्री एकमुश्त बोनस देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.

हालांकि मैक्रों ने देश को अमीरों पर टैक्स लगाने से इनकार करते हुए कहा, "ये हमें कमज़ोर कर देगा और हमें नई नौकरियां पैदा करने की ज़रूरत है."

अपनी 'छवि बदलेंगे' मैक्रों
अब तक प्रदर्शनों को नज़रअंदाज़ करते रहे राष्ट्रपति मैक्रों ने स्वीकार किया कि बहुत से लोग अपने जीवनस्तर को लेकर नाख़ुश हैं और उन्हें लगता है कि उन्हें अनदेख किया जा रहा है.

उन्होंने कहा, "बीते चालीस सालों में ऐसे गांवों और बस्तियों में परेशानियां बढ़ी हैं जहां सार्वजनिक सेवाएं सिमट रही हैं और जीवनस्तर ख़राब हुआ है."

उन्होंने कहा कि ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्हें समाज में सही स्थान नहीं मिला है और हमने ऐसे संकेत दिए हैं कि हम उन्हें भूल गए हैं.

"मैं इस परिस्थिति के लिए अपनी ज़िम्मेदारी को स्वीकार करता हूं- मैंने आपको ये महसूस कराया होगा कि मेरी प्राथमिकताएं और चिंताएं कुछ और हैं. मैं जानता हूं कि आपमें से कुछ को मेरी बातों से दुख पहुंचा है."

पेशे से बैंकर रहे इमेनुएल मैक्रों पर आरोप हैं कि वो सामान्य लोगों के संघर्षों को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं.

अपने भाषण में उन्होंने अपनी इस छवि को बदलने का संकेत देते हुए कहा कि वो फ़्रांस के सभी इलाक़ों के मेयरों से मिलेंगे और जनता के मुद्दों पर बहस को बढ़ावा देंगे.

फ़्रांस की राजधानी पेरिस समेत कई शहरों में बीचे चार सप्ताह से हर सप्ताहांत प्रदर्शन किए गए. इस दौरान हज़ारों लोगों को हिरासत में लिया गया और सैकड़ों घायल भी हुए.

बीते शनिवार को हुए प्रदर्शन में सौ से ज़्यादा लोग घायल हुए थे और एक हज़ार से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया था.

हिंसक प्रदर्शनकारियों ने कई गाड़ियों और दुकानों को नुक़सान भी पहुंचाया था. राष्ट्रपति इमेनुएल मैक्रों पर प्रदर्शनकारियों के मुद्दों पर जवाब देने का दबाव था.

पेरिस में मौजूद बीबीसी संवाददाता हग स्कोफ़ील्ड्स के मुताबिक मैक्रों के पास ठोस क़दम उठाने के सिवा और कोई विकल्प नहीं था.