सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में अपने ही दिए मौत की सज़ा के फ़ैसले को पलटते हुए बीते 16 साल से जेल में बंद छह लोगों को छोड़ने का आदेश दिया है. इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर में लिखा गया है कि ऐसा बहुत कम मामलों में होता है.
कोर्ट ने इन छह लोगों को न सिर्फ़ छोड़ा बल्कि पांच लाख रुपये मुआवज़े के तौर पर देने का भी आदेश दिया है. कोर्ट का कहना है कि उनके मामले में निष्पक्ष जांच नहीं हुई है क्योंकि ये लोग खानाबदोश जनजाति से हैं.
इन छह लोगों को हत्या और बलत्कार के मामले में मौत की सज़ा सुनाई गई थी. बाद में इस मामले में पुनर्विचार याचिका दायर की गई और अब कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की तरफ से मामले में खामियां होने के चलते इन्हें रिहा करने का आदेश दिया है.
इन छह लोगों पर साल 2003 में नाशिक के एक ही परिवार के पांच लोगों की हत्या और एक महिला और उनकी बेटी के साथ बलात्कार करने और डकैती करने का आरोप लगाया गया था.
जस्टिस एके सीकरी, एस अब्दुल नज़ीर और एम आर शाह की बेंच ने इस मामले में महाराष्ट्र पुलिस को फिर से जांच करने और अपराधियों को पकड़ने के आदेश दिए हैं.
अमर उजाला में छपी एक ख़बर के मुताबिक़ नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने आशंका जताई है कि अब भारत पर समुद्र के रास्ते चरमपंथी हमला हो सकता है.
उन्होंने कहा है कि नौसेना के पास जानकारी है कि चरमपंथियों को समुद्र मार्ग समेत अलग-अलग तरीकों से हमले करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है.
सुनील लांबा ने ये बात हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद कार्यक्रम के दौरान कही. उन्होंने वैश्विक विशेषज्ञों और राजनयिकों की मौजूदगी में कहा कि भारत को चरमपंथ का क्रूरतम रूप झेलना पड़ा है और राष्ट्र समर्थित चरमपंथ आज की सबसे बड़ी हकीकत है.
उनका कहना है कि भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठान इस ख़तरे को दूर करने के लिए काम कर रहे हैं.
टाइम्स ऑफ इंडिया की ख़बर के अनुसार पुलवामा हमले में मारे गए एक और सीआरपीएफ़ जवान की पत्नी ने बालाकोट में भारतीय हवाई हमले के सबूत मांगे हैं.
सीआरपीएफ़ जवान राम वकील की पत्नी गीता देवी ने कहा है कि केंद्र सरकार को चरमपंथियों के मारे जाने का कुछ सबूत देना चाहिए. राम वकील की बहन का भी कहना है कि लोगों को भी ये जानने की ज़रूरत है कि बालाकोट में क्या हुआ था.
एक हफ़्ते पहले पुलवामा हमले में ही मारे गए जवान प्रदीप कुमार की पत्नी शामली ने भी हमले में चरमपंथियों के मारे जाने के सबूत मांगे थे.
नवभारत टाइम्स में छपी एक ख़बर के अनुसार इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्ट ने अपनी एक रिपोर्ट में गाड़ियों के धुंए से होने वाले प्रदूषण को लेकर चेतावनी दी है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि गाड़ियों के धुंए से होने वाली मौतों में भारत दूसरे नंबर पर है. इस मामले में बड़े शहरों में दिल्ली छठे स्थान पर है.
वाहनों के धुएं के सेहत पर असर को लेकर हुए इस अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में साल 2015 के आंकड़ों को आधार बनाया गया है.
इसमें कहा गया है कि 2015 में दिल्ली में प्रदूषण से आठ लाख लोगों की जानें गईं थीं जिनमें से 74 हज़ार मौतें गाड़ियों के प्रदूषण के कारण हुई थीं.
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